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जनता है आती'-पंजाब

Neeraj sharmaNeeraj sharma January 3, 2022
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जनता है आती'-पंजाब
                           (नीरज शर्मा)


बहन जी तुला में तोल रही पंजाब में अपना हाथी,नए साल में बना लिया उन्होंने अपना नया साथी,दोनो ढूंढ रहे जमीन अपनी अपनी पजांब में मार मार के उल्टी सीधी राजनितिक गुलाटी।

झाड़ू पहुंचा कहता जनता हमें ही है बस पहली पसन्द बताती, हाथ भी शामिल है जनता को दे नया हर काम में निपुण प्रत्याशी,फूल सूंघने से हर कोई डरता सोचे हो ना जाए कहीं करोना वाला जुकाम-खांसी।

देखो कैसे लग रही है बोली जनता की पाने को अपने नाम की ख्याति,कोई कहता दूंगा फ्री बिजली जो चौबस घंटे रहेगी आती, कोई कहता महिलाओं को हजार दूंगा दिखेगी तुम्हें जन-जन की गरीबी जाती,

कोई कहता अफीम की खेती दिखेगी हर तरफ खेतों में लहलहाती, सरकारें तो यही है चाहती हो जाऐ लोग इन चिज़ो के आदि,फिर खुद ही सरकार कहेगी नौजवानी देश की देखो कैसे है जवानी उड़ाती।

किसान भी बैठ गया देख मौका खेलने को अपना खेल सियासी, है रहती यह सियासत सब को मौके पर मौका दिखाती, खेल ना बिगाड़ लेना अपना जनता तो बस किसानों को इतना ही है समझाती।

किसानों को यही हैं कहना चाहते क्यों छीनते हो अपनी आजादी,क्यों दे रहे हो पैर इस में जो है दलदल सयासी,
डण्डे तुम्हारे से सरकार भी है खौफ खाती,यह राजनिति कहां कभी भाईयों को भाईयों से मिलाती।

कुर्सी नही है कभी भी जनता को हक पूरा देने आती, सरकारें तो हक तब है देती जब जनता अपनी ताकत उन्हें दिखाती,देखेंगे आगे अगर जनता अपनी सरकार बनाती तो क्या गुल है राजनीति खिलाती।

यह देख 'दिनकर' कि कविता अनायास यादों में ताजा है हो जाती,जिसे आज भी जनता है प्रेम सहित गाती,जो शीर्षक से ही कहानी है कह जाती, शीर्षक है 'सिंहासन खाली करो कि जनता है आती'।
                                     (मूल‌‌ रचना-नीरज शर्मा)

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