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ऐ वतन तेरे लिए

Neeraj sharmaNeeraj sharma January 14, 2022
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     ऐ वतन तेरे लिए     मातृभूमि के वीर सपूत
      (नीरज शर्मा)
         
                भारत में उन दिनों अंग्रेजों की हकूमत थी और पूरा देश अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए प्रयास कर रहा था।नलगढ़ा जो कि नोएडा एक्सप्रेस हाईवे के साथ लगता एक गांव है। उन्हीं दिनों हिदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख नेता चन्द्र शेखर आजाद,भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव एवं अन्य साथी नलगढ़ा में लगभग तीन साल अपनी योजनाओं को बनानें और क्रियान्वित करने तक भेस बदल कर रहे थे।एक दिन सर्दियों की दोपहरी में ये सभी और इसी गांव के कुछ विश्वासपात्र साथी इकट्ठे बैठे धूप सेक रहे थे और सभी अपने पुराने साथियों को याद कर रहे थे तो आजाद जिनको सभी पण्डित जी कहते थे उन्होंने बताया कि काकौरी काण्ड की योजना उन्होंने ने ही बनाई थी।उनके साथ प.रामप्रसाद विसमिल, राजेंद्र नाथ लाहिडी, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाकुल्लाह और‌ अन्य साथी थे । उन्होंने आगे कहा कि हमें पता था कि यह बहुत बड़ा काण्ड होगा और फिरंगी इस लूट में शामिल लोगों को गिरफ्तार करने के लिए देश भर में  कोहराम मचा देंगे।यह इस तरह की पहली योजना थी जिसे क्रान्तिकारी अंजाम देने जा रहे थे। काण्ड से एक रात पहले सभी साथी अपने हथियारों के साथ एक जगह इकट्ठे हुए तो आजाद ने कहा कि उन्होंने तो अंग्रेजी पुलिस से आजाद रहने की कसम बचपन में ले ली थी।यह सुन एक-एक कर सभी साथियों ने भी कसम खाई की अंग्रेजी पुलिस के हाथ आने के बाद और पुलिस के असहनीय अत्याचारों से टूट कर कोई भी दूसरे साथीयों के खिलाफ मुंह नही खोलेगा।यह सब पूर्ण होने के बाद अशफाक ने मजाक में कहा कि "पण्डित जी हम सब तो अपनी कसम निभा लेंगे क्यों कि हमें तो सिर्फ़ साथियों के खिलाफ मुंह नही खोलना पर आप आजाद रहने की कसम कैसे पूरी करेंगे क्यो कि उस समय पुलिस से बचना लगभग नामुमकिन होगा। यह सुनकर सब हंसने लगे और आजाद ने भी सबके साथ ठहाका लगाया। फिर थोड़ा गंभीर हो कर अचानक अपने कुर्ते की जेब में हाथ डाला और जब हाथ जेब से निकाला तो उनके हाथ में उनकी पिस्तौल की एक गोली थी। वो दृढ़ता से उस हाथ को हवा में लहराते हुए सब को गोली दिखाते हुए बोले। "यह गोली मेरे वचन कि जमानत देती है । जब तक इसमें बारुद भरा है तब तक समझ लेना कि मैं फिरंगियों से आजाद हूं और जिस दिन इसमे से लावा फूटकर बह गया तो‌ समझ जाना की आजाद मात्रभूमि के ऋण से भी आजाद हो गया",यह सुन बिस्मिल के मुख से सहसा हीबोल फूट पड़े "सरफिरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाजूऐ कातिल में है।
वक्त आने पे बता देंगे तुझे ऐ आसमां,हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में है" और उनके बाद आजाद का स्वर फिजा़ में गूंजा और उन्होंने अपने सुप्रसिद्ध यह  वाक्य कहे।
      "दुश्मनों की गोलियों का सामना करेंगे
       आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे"

सब ने एक दूसरे को देख हल्के स्वर में इंकलाब ज़िंदाबाद का नारा लगाया। यह सुन सभी वर्तमान में इकट्ठे साथीयों का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया और आंखों में प्रीत के आंसू झलक आऐ। फिर सभी ने एक साथ किसी भी हालत में पुलिस के हत्थे चढ़ने पर साथियों का नाम एवं योजनाएं पुलिस को ना बताने की कसम खाई।
इंकलाब जिंदाबाद
                               (नीरज शर्मा-9211017509)

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