Zindagi ki Kitaab's image
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जिंदगी की किताब के सफे पलटून तो,

कुछ पन्नो पे उंगलियां चिपकती हैं,

पन्ना पलटने नही देती....

और पोरों के चिपकने से उन पन्नो के हश्र और बड़े हो जाते है

कुछ अजीज यादें कुछ तजरबे मुंह तकते है...

शायद चिढ़ाते है...

उनको देखता हूं, फिर से पढ़ता हूं...पर

समझ नही आते

ये मेरी किस्मत या ख्वाहिश का आसमान नही था

मेरी अपनी शक्सियत का ये अरमान नही था...

तबियत और फैसलें हालातों से बदलते गए

हम ज्यादा गिरे और थोड़ा संभलते गए....

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