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शक्ति की आराधना

Naveen Kumar JoshiNaveen Kumar Joshi September 18, 2022
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*शक्ति आराधना*

आज मैं देख रहा यह कैसा दृश्य समर में।
मैं धर्म वह अधर्म फिर भी शक्ति है रावण के पक्ष में।।1
यह कैसा खेल रच रही है समर भवानी।
अधर्म का साथ और धर्म का कर रही है वह पानी।।2
हे जामवंत यह कैसा मोड़ है समर का।
क्या हारेगा धर्म और पक्ष जीतेगा अधर्म का।।3
हे रघुवर, रावण ने यह तपस्या कर पाया है।
तभी तो युद्ध में शक्ति  साथ आयी हैं।।4
हे रामअधर्म कभी ना सफल होता।
धर्म अधर्म मैं हमेशा धर्म विजित होता।।5
अब समर त्यागो ध्यान करो शक्ति का।
फिर देखो फल  अपनी भक्ति का।।6
राम हे शक्ति की पूजा में लीन जैसे मानो कोई सन्यासी।
मां शक्ति भी त्याग कर अधर्म का पक्ष धर्म के पक्ष में आने को प्यासी।।7
यह क्षण है पूजा के समाप्त होने का।
अंतिम कमल को शक्ति के चरणों में अर्पित होने का।।8
पर शक्ति ले रही परीक्षा धैर्य धारक राम का।
कमल चुराकर देख रही धैर्य मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान का ।।9
जैसे देखा अंतिम पुष्प नहीं है थाल में।
जागा विचार राम के कपाल में।।10
है यह वह क्षण था जिसमें हो रही थी सफल मेरी पूजा।
अब मृत्यु के अलावा बचा नहीं है कोई रास्ता दूजा।।11
परंतु अगले क्षण विचार आया मां पुकारती है मुझको कमलनयन।
तब राम ने उठाया तीर और बढ़ा दिया तीर तरफ अपना नयन।।12
तभी शक्ति प्रकट हुई बोली रुको है धैर्य धारक रघुनंदन।
तू अवश्य सफल होगा आशीष मैं दे रही हूं अभिनंदन।।13
जय हो जय हो तुम्हारी रघुवीर।
तुम सच में हो धैर्य धारक महावीर।।14
जाओ समर में मेरा आशीष तुम्हारे साथ हैं।
विजय का शंखनाद करो अब शक्ति तुम्हारे साथ हैं। 15

✍️ *नवीन कुमार जोशी*
 *चित्तौड़गढ़ राजस्थान*

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