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उसने अपनी आँखों में

Nandita SarkarNandita Sarkar November 6, 2021
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अपनी आँखों में उसने 
भर लिया शीशा
उस पर उठती हर उँगली ने देखी
खुद पर उठती हुई उँगली

ईश्वर ने अपने हाथ देखे उसमें
जिसने बनाया
परिभाषाएँ गढ़ने वाले इंसानों को

जर्जर दीवारों ने अपना चेहरा देखा उसमें
एक स्त्री ने देखी उसमें 
वासनाओं का समुद्र
पुरुष ने देखी निर्वस्त्र यातना

उसकी आँखों का आईना बढ़ता चला गया
एक नदी अपने बाँध तोड़कर सूख गई
ईश्वर हँस पड़ा इंसानों के स्वांग पर
प्रकृति ने पतझड़ का मातम नहीं मनाया
पीला पत्ता नहीं रोया अपने मुरझाने पर

फिर कभी कोई नहीं हँसा
उसकी देह पर।

~ नन्दिता सरकार

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