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Romantic PoetryPoetry1 min read

तुम क्यों नहीं आए

Nand Kishore kashmiraNand Kishore kashmira March 17, 2022
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अब मुझे अबीर कौन लगाए

इस होली तुम क्यों नहीं आए?


सब खेल रहे मिल कर होली

करते आपस में खूब ठिठोली

मुझे काटने आते हैं ये सब रंग

मैं होली खेलूं तो किसके संग


सब लगते हैं मुझको पराए

इस होली तुम क्यों नहीं आए?


थिरक रहे सब होली गीतों पर

मेरे पांव तो जैसे हुए पत्थर

वो सब आपस में करें इशारे

मैं विरहिणी चुप शर्म के मारे


मुझे लोक लाज से कौन बचाए

इस होली तुम क्यों नहीं आए ?

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