तिरंगा's image
Share0 Bookmarks 32 Reads0 Likes

हाथ में उसके तिरंगा था।

खुद वो शख्स अधनंगा था।

आंखों में उसकी बेकरारी थी।

उधर झंडा रोहण की तैयारी थी।


सजे हुए थे लड्डू थाल पर

शिकन थी इसके भाल पर

भूख से दोहरा हुआ जाता था

बेरोजगार,कुछ नही कमाता था


झंडे इतने देखकर सोचा उसने

उसकी बुधिया का तन ढक जाता

अगर उसे भी किसी तरह

एक कपड़े का टुकड़ा मिल जाता


ये सोच गला भर आया उसका

मिली ऐसी हमें आजादी क्या

जब देश में इतने भूखे नंगे

इस सब में इतनी बरबादी क्या

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts