पिताश्री's image
Share0 Bookmarks 23 Reads0 Likes

वो जो मुझको इस धरा पर था लाया ।

जिसने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया।


बारिशों,आंधियों के थपेड़े बहुत पड़े झेलने।

वही तो था जिसने इनको सहना सिखाया।


जो मेरे दर्द में चीखने लगता था खुद भी।

मेरे जख्मों पर जिसने मरहम लगाया।


कितनी मुश्किलें थीं जीवन में उसके।

मुस्कुराते चेहरे ने उसके, कुछ ना बताया।


मैं जो भी, जहां भी, हूं उसी की बदौलत।

कृतज्ञ पुत्र पर रखना सदैव अपना साया।


..........................नंदन...

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts