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कोशिश जारी है

Nand Kishore kashmiraNand Kishore kashmira March 2, 2022
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तुझको भुलाने की कोशिश जारी है

जानता हूं ये अपने आप से गद्दारी है


सुर्ख आंखे हुई हैं मगर रोया नहीं हूं मैं

ये तो बस कल रात की खुमारी है


बस एक दो दिन और जी भर के देख लूं

हटा दूंगा दीवार से वो जो तस्वीर तुम्हारी है


घड़ी घड़ी देखता हूं यूं ही दरवाजे की तरफ़

मुझे थोड़े ही किसी क़िस्म की बेकरारी है


चंद निशानात मिटाने बाकी है तेरी यादों के

वैसे अब तक की यही दौलत मेरी सारी है


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