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इज़हार ए इश्क

Nand Kishore kashmiraNand Kishore kashmira February 4, 2022
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मैं ही इस तरफ़ शोले सा दहकता क्यों रहूं।

कुछ आंच तेरी तरफ़ से भी तो आनी चाहिए।।


मेरे इश्क को सबने इबारत सा पढ़ा।

अब तेरे इश्क की भी कोई निशानी चाहिए।।


मेरे लब खामोश थे, न जाने क्या सुना तूने।

अब ये ग़लतफहमी तो मिटानी चाहिए ।।


मैं लिखता हूं तेरे लिए ग़ज़ल जिस ज़ुबां में।

वही ज़ुबां तुझको भी तो आनी चाहिए ।।

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