डर's image
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है कोई वज़ह या बिन बात का डर है।

शायद उन्हें बेकाबू जज़्बात का डर है।।


खुला खुला आसमां ,चमकता आफताब।

ऐसे में भी तुमको बरसात का डर है ।।


बेवफ़ा सनम गुजरते हैं जिस राह से ।

गुजरेंगे न उस से मुलाक़ात का डर है।।


हादसे की रात बीती,सुबह होने वाली है।

दिन निकला नहीं , फिर से रात का डर है।।


वो लाख भी बुलाएं तो हम न जायेंगे वहां ।

उनकी महफ़िल में हमें खुराफात का डर है।


खामोश देखते हैं उनकी बदनीयती को हम।

अपने घर के बिगड़ते हालात का डर है ।।



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