चुनाव's image
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बमुश्किल दबे अरमान, 

दिल से निकल आए हैं।

सभी छिपे हुए कोकरोच

बिल से निकल आए हैंll

लफ्जों में तल्खी और,

रिश्तों में तनाव आ गया है।

लगता है फिर से कोई

चुनाव आ गया है ।।

छलिया फिर से वादों की

बीन बजाने लगा।

बिछ गई है बिसात

नए तौर से देने को दगा ।।

वो भोला भाला क्या

इस बार भी ठगा जायेगा?

या छुपा कोई तुरूप का

इक्का निकाल लायेगा?

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