नासमझ's image
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मैंने खुद को 
दरबदर भटकते देखा है,
अंगारों पर खुद को 
चलते देखा है,
मोहब्बत का आलम
कुछ इस कदर था उनसे
कि, खुद ही को खुद से
लड़ते देखा है।

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