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तुम फूल बनकर कभी महक न सकी , मैं भौंरा बन तुम्हारे करीब चक्कर लगाता रहा

Nageshwar GiriNageshwar Giri December 10, 2021
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तुम फूल बनकर कभी महक न सकी,
मैं भौंरा बन तुम्हारे करीब चक्कर लगाता रहा ।

तोड़ ले गया वनमाली पलभर में तुम्हें,
मैं दौड़ता पीछे तुम्हारे आता रहा ।

तुम रुसवा होती गयी बार बार खिलकर,
मैं सुबह की इन्तेजार में कितने शाम बिताता रहा ।

चाहा चूम लूँ उड़कर तुम्हें अब देर न करूं ,
लेकिन हमारे तुम्हारे दरमियाँ वही वनमाली आता रहा ।

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