दूर बरगद की शीतल छाँव में ,फिर उदास बैठी हो किनारे गांव में's image
Love PoetryPoetry1 min read

दूर बरगद की शीतल छाँव में ,फिर उदास बैठी हो किनारे गांव में

Nageshwar GiriNageshwar Giri December 10, 2021
Share0 Bookmarks 50 Reads1 Likes
दूर बरगद की शीतल छाँव में,
फिर उदास बैठी हो किनारे गांव में,

शायद याद हमारी आ रही होगी,
खुले केशों को तुम सजा रही होगी ,

तुम प्रीत हो हमारी कई सदी की,
तुम देख रही होगी बहाव नदी की,

तुम पानी में पैरों को भिगा रही होगी,
मैं गुजर रहा हूँ देखो एक नाव जा रही होगी ।।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts