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हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में.....

Mukta Sharma TripathiMukta Sharma Tripathi December 19, 2021
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हम साहस का ईधन भर, तुम संग सफ़र करते हैं।
हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में, डर-डर के आगे बढ़ते हैं।
H.D.चैनल चलवा कर।
LED फिट करवा कर।
नये ब्रैंड के तेरे फोन में,
नैट पैक फुल, डलवा कर।।
नई-नई मशीनों से नित, हम अपने घर को भरते हैं।
हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में, डर-डर के आगे बढ़ते हैं।
हर माह फिल्म दिखलाता हूँ।
Shopping ख़ूब कराता हूँ।
कहीं काम न करना पड़े तुम्हें,
नौकरानी का बोझ उठाता हूँ।।
तुम को प्रिय खुश रखने की, हर पल कोशिश करते हैं।
हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में, डर-डर के आगे बढ़ते हैं।।
पार्लर न कहीं, रह जाए।
पर्स न खाली रह जाए!
तेरी बड़ी सी अलमारी का,
न कोना सूना रह जाए।
सारी कमाई लाकर प्रिय! हम तेरे ही हाथ में धरते हैं।
हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में, डर- डर  के आगे बढ़ते हैं।।
ज़हर कहीं न घुल जाए।
हंसी कहीं न धुल जाए।
श्रोता पक्का मैं बना रहूँ,
जुबान कहीं न खुल जाए।।
तेरी हर इच्छा के आगे बस, झर-झर झरने सा झरते हैं।।
हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में, डर-डर के आगे बढ़ते हैं।।
मुस्कान तेरी यूँ घनी रहे।
चंचल तू हमेशा, बनी रहे।
कैसे भी करके, बस मेरी
रात की रानी, धनी रहे।।
दिलबर हम जैसे बस, अजी! अपनी जान से डरते हैं।
हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में, डर-डर के आगे बढ़ते हैं।। 

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