"उत्तराखण्ड"'s image
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नदियों के कलनिनाद और
हिमगिरी के उत्तंग शिखर,
             देवभूमि यह देवालय है
             बसते हैं जहाँ शिव शंकर।
स्वच्छ वायु नीला आकाश
काफ़ल पाको खिले बुरांश,
             सुंदर अभ्यारण्य यहाँ की
             वादियाँ करें प्रसन्न
धन्य धन्य हूँ धन्य
जन्मभूमि उत्तराखण्ड।
             पहाड़ मेरे बचपन के यार
             कहे ये सीना तान खड़े,
दिये कवि पंत कभी और
सदा वीर जवान दिये।
             मुनाल से सुंदर पंख पसार
             कस्तूरी मृग से फुर्तीले,
कण-कण सुंदरता बसती यूं
ब्रह्मकमल चहूँ ओर खिले।
             धराधर उतरे नमन करें
             जय हो मैया गंग,
धन्य धन्य हूँ धन्य
जन्मभूमि उत्तराखण्ड।

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