"अकेले-दम"'s image
क्या हुआ? गर नफ़रती कोई अंधेरा कर गया,
लेकर मशाल प्रेम की, मैं राह तन्हा चल दिया।

आसाँ न थी कोई डगर, थीं वीरान सारी बस्तियाँ,
खूंखार लहरें भी थमीं, लेकर जो हस्ती चल दिया।

वार पर अपने सभी खंजर भी कुछ हैरान थे,
जवाब ज़ख्म शोर का, मैं मौन देता चल दिया।

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