Zindagi Ka Safar's image
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उजाला है हर एक शहर में

फिर भी अँधेरा-सा लगता है


कई शामे गुज़री इन गलियों में आसिफ़

फिर भी कुछ सवेरा-सा लगता है


हम जहाँ थे वहां ठीक थे अपने थे

यहाँ हर कोई हमको पराया-सा लगता है


सब कुछ पास था ना किसी की आस थी

यहाँ पर तो सांसों में भी किराया-सा लगता है


अब यही इंतिहां है गुज़री हुई ज़िन्दगी की

अब यहाँ से निकलना भी नामुमकिन-सा लगता है

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