मुझे आज़ाद ज़मीं के पन्नों को पढ़ना हैं's image
Zyada Poetry ContestPoetry1 min read

मुझे आज़ाद ज़मीं के पन्नों को पढ़ना हैं

Muhammad Asif AliMuhammad Asif Ali November 16, 2021
Share0 Bookmarks 35 Reads1 Likes

मुझे आज़ाद ज़मीं के पन्नों को पढ़ना हैं

मुझे भी दीदार-ए-संविधान करना है


ये नफ़रत की राजनीती अब देखी नहीं जाती

मुझे भी राजनीती के कुछ हिस्सों को बदलना है


आओ जमकर कहें बुरा जो जितना बुरा है

क्यों हमें भी नफ़रत की आग में जलना है


जिनके बहे लहू उनकी याद नहीं मिटने देंगें

बस यही जोश अपने देश में भरना है


क्यों डरें किसी के डराने से अब हम

अब तो बस आस्तीन के सांप को डरना है।


Written by

-Muhammad Asif Ali

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts