ख़्वाब को साथ मिलकर सजाने लगे's image
Romantic PoetryPoetry1 min read

ख़्वाब को साथ मिलकर सजाने लगे

Muhammad Asif AliMuhammad Asif Ali May 26, 2022
Share0 Bookmarks 33 Reads0 Likes

ख़्वाब को साथ मिलकर सजाने लगे

घर कहीं इस तरह हम बसाने लगे

कर दिया है ख़फ़ा इस तरह से हमें

मान हम थे गए फिर मनाने लगे


~ मुहम्मद आसिफ अली

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts