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कभी हकीकत कभी फ़साना लिखता हूँ

सुरेश 'सागर'सुरेश 'सागर' August 18, 2022
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कभी हकीकत कभी फ़साना लिखता हूँ 
बीते हुए लम्हों का ज़माना लिखता हूँ 

अपना दिल काबू में रख कर मुझे पढ़ना.. 
आशिक नहीं हूँ बस थोड़ा शायराना लिखता हूँ 

महफिलों में तो रह लेता हूँ सतरंगी सा 
तन्हाई में अक्सर बड़ा वीराना लगता हूँ 

इतने रंग जिंदगी के मुझे दुनिया ने दिखाए हैं 
की आज थोड़ी सी उमर में सयाना दिखता हूँ 


~सुरेश 'सागर'

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