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छठ लोक गीत "कांच ही बांस के बहंगिया"

मृणाल सिंह (उत्तम)❤मृणाल सिंह (उत्तम)❤ October 30, 2022
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कांच ही बांस के बहंगिया,
कांच ही बांस के बहंगिया,

बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए ||

होए ना बलम जी कहरिया ,
बहंगी घाटे पहुंचाए,
बहंगी घाटे पहुंचाए |

कांच ही बांस के बहंगिया ,
बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए ||
बाट जे पूछे ना बटोहिया ,
बहंगी केकरा के जाय,
बहंगी केकरा के जाय |

तू तो आंध्र होवे रे बटोहिया ,
बहंगी छठ मैया के जाए,
बहंगी छठ मैया के जाए |

वह रे जे बाड़ी छठी मैया ,
बहंगी उनका के जाए,
बहंगी उनका के जाए|

कांच ही बांस के बहंगिया
बहंगी लचकत जाए,
बहंगी लचकत जाए ||

होए ना देवर जी कहरिया ,
बहंगी घाटे पहुंचाई,
बहंगी घाटे पहुंचाई ||

वह रे जो बाड़ी छठी मैया
बहंगी उनका के जाए,
बहंगी उनका के जाए ||

बाटे जे पूछे ना बटोहिया
बहंगी केकरा के जाय,
बहंगी केकरा के जाय ||

तू तो आन्हर होय रे बटोहिया
बहंगी छठ मैया के जाए,
बहंगी छठ मैया के जाए ||

वह रे जय भइली छठी मैया ,
बहंगी उनका के जाए,
बहंगी उनका के जाए ||




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