सुकून's image

लम्हे लम्हे की सियासत है 

सदियों सदियों का बहाना है 

कुछ कर गुजरने की नियत है 

कुछ कर गुजरने का ज़माना है 

ख़ाली घर छोड़ा है 

बस्ती का ठिकाना है 

रोटी तो मुमकिन है 

भूख का फसाना है 

अहले जहां की मेहनत है 

फिसलती रेत सा सुकून 

ज़र्रा ज़र्रा पिघलता जिगर है 

दरिया दरिया बहता खून 

किनारे ढूँढने की ज़िद है 

कश्ती में सुराख़ों का जुनून 

सुख़न में एक दिन के मेले है 

अफ़ात में हर दिन का मज़मून

हर दिन पीछे छूटता गाँव है 

हर रोज़ आगे बढ़ता हुजूम

अपनो की कमी है

दिल की हालत ख़स्ता है 

अपने भी ना निकले मामून

मौत का दिन मु'अय्यन है 

क़यामत से पहले का सुकून

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts