जो हूं सो हूं's image
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आदि अंत मुझ में नहीं 
मुझ में युग और कल्प न  
भूत भविष्य वर्तमान की 
मुझ में न कोई कल्पना

कोई कामना मुझ में नहीं
विचारों का अवकास हूं 
बुद्धि से तोलो नहीं 
मैं वस्तु कुछ खास हूं

भूल अपना मूल क्यूं
करे चेष्टा व्यर्थों में 
मुझको क्या बांधे शब्दों में 
और शब्दों के अर्थों में

मुझसे उपजा मुझको जानेगा
क्या मैं इतना गौण हूं 
मेरी माया से मोहित !
मुझको क्या जाने कौन हूं

जो हूं सो हूं...

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