ग़ज़ल - पुलवामा's image
Poetry1 min read

ग़ज़ल - पुलवामा

Afsar AmiimAfsar Amiim March 11, 2022
Share1 Bookmarks 37 Reads1 Likes
हमको अब भी ये कहानी याद है,
नव-जवानों की जवानी याद है।

मैं ने जो पूछा किसी से, याद है,
वो कहा कुर्बानी, यानी याद है।

आह की आवाज़ सुनकर फ़ौज की,
रुक गया था बहता पानी याद है।

प्रेम का दिन है मगर मैं गम में हूं,
मुझको पुलवामा जबानी याद है।

- अफसर अमीम

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts