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बेटी देश की शान हैं

NishaNisha August 11, 2022
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हम बेटियों को कभी खुद के लिए जीना ही नहीं सिखाया जाता। सुबकुछ दूसरों के लिए करना होता है। हमें एक साँचे में ढ़ाला जाता है और हम उसी के अनुसार ढ़ल जाती हैं। लाख शिकायतों के बावजूद किसी बात के लिए सिकवा नहीं करती। हम अच्छी बेटी का किताब ले लेते हैं। घर-परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी आपकी तारीफों के पुल बांध देते हैं। फलाना की बेटी तो गाय है, देखों घर का सारा काम करती है, कभी किसी को पलटकर जवाब नहीं देती, सर झुकाकर चलती है, हमने कभी उसे गली में खड़े नहीं देखा, कम हँसती है, स्कूल-कॉलेज से सीधा घर आती है, किसी की तरफ देखती तक नहीं,  बोलती भी कम है, भगवान ऐसी बेटियाँ सबको दें।

फिर किसी दिन वही बेटी कहती है मुझे पढ़ना है, जॉब करनी है, अभी शादी नहीं करनी तब अचानक से वही सभ्य बेटी सबकी आँखों की किरकिरी बन जाती है। जल्दी जल्दी उसकी रुखसती के ख्वाब देखें जाने लगते हैं। अपने हक में बात करने वाली बेटियां उन्हें कभी पसंद नहीं आती। पसंद आती है वो गाय जैसी बेटी जिसे कभी भी किसी भी खूंटे से खोलकर दूसरे खूंटे पर बाँध दिया जाता है और वो उफ्फ़ भी नहीं करती। हां गाय। वही गाय जिसे खेत में खुला भी छोड़ते हैं तो मूंह पर छींका बाँध दिया जाता ताकि फसल न खा सके। गाय को लगता है वह हरे हरे खेतों में आजाद है लेकिन जब घास खाने की कोशिश करती है तो सिवाय निराशा के कुछ भी हाथ नहीं लगता। 

बेटियों को गाय बनाने वालों ने आखिर उसे चिडिय़ा क्यों नहीं बनाया? जो खुले आकाश में पंख फैलाये उड़ती हैं? वो तुम्हें कभी चिडिय़ा नहीं बनने देंगे लेकिन मैं कहती हूँ तुम गाय मत बनना गाय की नियति खूंटे से बंध जाना है। तुम चिडिय़ा बनना, खुले आकाश में उड़ना, अपना आसमान खुद तय करना। अपने सपने, अपने अधिकार लड़ कर लेना क्योंकि यहां बिना लड़े कुछ भी नहीं मिलता।


**निशु**

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