वक़्त's image
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अचानक हालात कुछ ऐसे हो गये

कुछ पल के लिए हम सोच में खो गये

ए इशारा मिल रहा है वक़्त से

अब नये चैलेंज में हम खो गये

कहीं मिलेगा बसेरा- सफर

एक सवाल,

मै इन सवालों में उलझ कर रह गयी

नीयत को स्वीकार करना है मगर

कस्मकश मे जग रही थी रात भर

है भरोसा अपने ईष्ट पर

वक़्त से पहले सफल हो जाउंगी मगर

वो हमें नीचा दिखाने के जिद्द पर ,

अङे रह गये,

हालात से लड़ती रही उम्र भर

हर जगह धोखा मिला फिर भी मगर,

विश्वास रहा अटल अपने ईष्ट पर,

एक दिन मेरे भी संकल्प पूरे होंगे

सब विरोधी नजरें झुका कर रह गये।

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