वक्त का पहिया's image
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वक्त का उतार चढाव विश्वामित्र संग शिक्षा लेने आए, राम लखन दोनों भाई, फूल तोड़ने गए फुलवारी, सीता जी को देख विकल भए रघुराई, धनुष यज्ञ में धनुष तोड़ सीता जी को घर लाए, सीते सीते कह खुश रहते थे रघुराई , जब वनवास हुआ सीता जी को साथ लिए। अभेद शब्द से विकल सीता जी को , जंगल भेज दिए रघुराई, अश्वमेध में घोड़ा पकड़े सामने प्रगट हुए, लवकुश दोनों भाई, उनके वीरता भरी बातों को सुन, मुस्कुराते थे रघुराई सीता जी अग्नि परीक्षा हुई फटी धरती मां के गोद में समा गई , सीते -सीते कहते घबरा गए रघुराई।

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