मोहन की मीरा's image
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मोहन के लिए मीरा बाई"

कैसे काबू करे हम इस पर,

मन चंचल बौराये,

पागल बन भटके बन-बन

कहीं ना चैना पाये,

मनवां चंचल हो गया,

जब से मिलें दो नैना,

खो गया मन का चैना ,

हर पल भटके दर -दर,

दिल बेकरार हो गया,

मन का शुकून खो गया,

मनवा चंचल हो गया,

पल -पल उसको ढूंढ रहा है,

पागल बन कर घूम रहा है,

उनकी कजरारी काली अंखियों में,

दिल का शुकून खो गया,

मनवा चंचल हो गया,#

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