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"मीराबाई का प्रेम"

मन जब घराए जा बैठू,

पीपल के छांव में,

यही है कृष्ण बसेरा,

लगी है मन की आस में,पीपल की छांव में,

साख-साख पत्ता डोले,

मेरा मन लहराये,

आ जाओ श्याम यहीं,

करेंगें मनुहार,

अपने-अपने मन के भाव में,

पीपल के छांव में#

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