मां का आंचल's image
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बारिश में भीगता एक मासूम बच्चा,

रोता बिलखता अपने मां के पीछे भाग रहा था

वर्षा की बूंदें उसके बदन से सिमट कर

उसके आंसुओं को धो रहीथी

कपड़ों के नाम पर चिथड़े लिपट रहे थे

मासूम नंगे बदन को ढकने की कोशिश कर रहे थे

भूखा विलखता बचपन क्या यूं ही रह जाएगा

इनको दो वक्त की रोटी तन ढकना हुआ मुहाल

यही सोच सोच मै आगे बढती जा रही थी

देखा कि अचानक बच्चा लुढक गया

मां- मां कहकर धरती से सिमट गया

दौड़कर मां ने बच्चे को उठाया

फटे आंचल का छतरी यूं बनाया

जैसे वर्षा की बूंदें अब ना भिगो पाएंगी

अब एक भी बूंद उसके लाल को न छू पायेगी

मां वो शक्ति है जो तूफान को रोक देती है

फिर ए वारिश की बूंदें क्या कर सकती हैं





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