मगरूर's image
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हम ए नहीं कहते कि मंगरूर मत होना,

बस ध्यान रहे इतना किसी को जख्म मत देना,

ज़ख्म अपनो से जब मिलता है नासूर बन जाता है,

उसी एहसास में जीवन अभिशाप बन जाता है।

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