जीवन सफर's image
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मशरूफियो में बीता ए जीवन सफर,

मिला ठोकर यहां बनकर हम सफर,

खोया सब कुछ यहां अब ना कुछ भी यहां,

आशाओं की हर डोर अब टूटने लगी,

शाम ढलने लगी सांस थमने लगी,

कोई चाहत नहीं जिंदगी की रही,

चंद खुशियां भी हमको मयस्सर नहीं,

देख इंसाफ तेरा मै रोया बहुत,

आज अपने पराए भी हो रहे है जुदा,

गम की चादर भी अब तो सरकने लगी,

सारी आशाएं अब निराशाओं में बदलने लगी,

जीवन की हर कड़ी अब बिखरने लगी।

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