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गूलर का फूल


डाली -डाली कही- कहीं हरे ,हरे

कही लाल लटटू जैसे लड़ी से भरे,

देख ,देख सबका जी ललचाए,

तुम कितने सुंदर लगते हो अंजीर

तुम्हारा वह रिश्ता कहां छिपा है,

जिसका आज तक कोई देख न पाया तस्वीर

सुना है हमने बस आधी रात को खिलते हो,

कब खिलते हो लुप्त हो जाते हो

कोई देख न पाया,

क्या रंग है क्या है रूप तुम्हारा

कितने लोगों ने रात को जागा,

बड़ी उत्सुकता भरे मन में

फिर भी कोई समझ न पाया,

जितने सुंदर दिखते हो तुम

जितने सुंदर दिखते हो तुम,

उतने गुण से लवरेज हो तुम,

बड़े अद्भुत रूप है तुम्हारा।

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