धूप छांव's image
Share0 Bookmarks 62 Reads0 Likes

अपने और पराए में

जीवन भवर बन रह गया,

मंजिल भी अंजान बन गई

सपनों का महल बिखर गया,

रेत बनी मंजिल भी राहें

अपनो का दामन छूट गया,

जीवन की अब साझ हो रही

गम के बादल हटे नहीं,

चंद खुशी के पल बिन,

अब जीवन के पल कटे नहीं,

गम और खुशी के पहरो में

मैने जीना सीख लिया।



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts