बदलता जीवन's image
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जीवन तेरे रूप अनेक

कभी हसाये कभी रुलाए

पल -पल में कई ख्वाब दिखाए

उठती -गिरती लहरों साबदलेहर पल वेष

जीवन तेरे रूप अनेक,

ना कोई दोस्त ना कोई यार

दुनिया है बस एक बयपार

लाभ हानि के इस खेल में

इंसान के कई रूप है देख

जीवन तेरे रूप अनेक

लोभ मोह के अंधे पन में

वजूद खो गया इंसान का

भौतिकता की चकाचौंध में

मानवता के बदले वेष

जीवन तेरे रूप अनेक।


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