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अवधी भाषा

गोरी की आंख बड़ी रतनारी,

हाथ में शोभे हरि-हरि चुड़िया

ना जाने चुड़िया की मोल ,

सजन हमरो परदेशिया

जब परदेशी छुट्टी घर आया

बड़े शौक से मै थाली लगायी

ना जाने रोटी की मोल ,

सजन हमरो परदेशिया ।

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