मेरी सहेली मेरी जैसी's image
Poetry1 min read

मेरी सहेली मेरी जैसी

Megha SinghMegha Singh November 13, 2022
Share0 Bookmarks 38 Reads0 Likes
मेरी सहेली मेरी जैसी
उसकी कहानी मेरी जुबानी,

जब मै अकेली थी, जब मैं भटकी थी
न कोई दूर था, न कोई पास था
दिल भरी थी, आखे गिली थी ।

कई बाते उमर रही थी,
लहरो सी दौङ रही थी ।
कोई ना था थामने वाला,
कोई ना था सम्भालने वाला।

तब भीङ की दुनिया में,
कोई मिली शांत सी दुनिया में।
वो यही थी , पर मैं बेखबर थी।

जब मैं उससे मिली,
हमारी कहानी जुङने लगी।
अकेलापन दूर हुआ, जैसे भोर भया।

परदे के पिछे की मुस्कान,
आज चेहरे की है सान।

अब हम है पक्की सहेली,
जैसे एक सुर मे दो ताल।

हम हर रोज मिलते हैं,
 कई सारी बाते करते हैं।

हर खुशी हर गम,
साथ हसते-रोते हम।

उसका मेरे पास होना,
हर परेशानी का हल होना।

अब एक अटूट विश्वास,
 है हम दोनो के साथ।

हर सुबह उसकी देख मुस्कान 
आईने मे कहती, धन्यवाद।

मेरी सहेली मेरी जैसी,
 हमारी कहानी मेरी जुबानी।

                                     - @ मेघा

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts