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कलम एक स्वरुप अनेक

Megha SinghMegha Singh November 5, 2022
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कलम ही मेरी ताकत, 
कलम ही मेरी पहचान। 

 मा कहती ये तेरी तलवार, येही तेरा सिंगार 

 इससे लिख सकती हैं, कहानी जुबानी
इससे कर सकती हैं, दुनिया सुहानी।

कलम ही सपनों की बुनियाद,
कलम ही, रचती इतिहास।

कलम ही मेरी ताकत,
 कलम ही मेरा पहचान।

 माँ कहती ये तेरा दर्पण, येही तेरा अवलोकन

भर देती खाली पन्नो को,
मेरी रंग- बिरंगी कहानियों से।

कहीं मेरी मुस्कुराहट सजाती,
कहीं मेरा गम चुपाती।

 कलम ही मेरी साथी,
कलम ही मेरी राही।

 कलम ही मेरी ताकत, 
कलम ही मेरी पहचान ।
                                 -@ मेघा


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