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एक अजनबी को अजनबी ही रहने दिया

Meet ShahMeet Shah November 3, 2021
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और क्या हुआ था फिर ?

बस कुछ नहीं
आज फिरसे एक अजनबी को अजनबी ही रहने दिया
इतना करीब लाके साइड से निकल गए
कभी अपना रास्ता पे ज्यादा विश्वास रखके किसी दूसरे को ना आने देना की कठोरता भी अलग मिजाज दे जाती हे
कुछ गलत नाइ था सब सही ही था
नहीं गलती उसकी थी
नहीं गलती हमारी थी

बस आज दिल की सुन ली
आज मेने खुद को अलग महसूस किया
अगर वो अच्छा भी होता तो भी अपने से अलग था
रास्ता और मंझिल दोनों अलग थी
साथ रहकर भी तो दुरी को पास लाना था
बेहतर होता वो कम्प्यूटर वाली दुरी
जिस्मे न तो मिलने का आश्रा होता
न तो कोई जिक्र होता
बस हम अपना सहायता देते रहते
दिल म तस्वीर छुपा कर|

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