Desh Prem's image
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देश प्रेम सुनो सुनो भारत देश के प्यारे बच्चो,

और होनहार नौ जवानो।

देश प्रेम क्या है, अब तुम

कब और कैसे जानो।


लहुके हर कतरों से उन्होंने जब,

ये सुंदर बागको सींचा था।

तब जाके प्यारा तिरंगा

आस्माँ में लहराया था।


सौ सौ गोलियोंकी बौछारे

जालियावाला बागकी जुबानी थी।

मुठी भर नमक की खातीर बापुने

कुच करनेको ठानी थी।


खुब लडी मर्दानी, वह तो

झांसीवाली रानी थी।

इस जगमें हम सबको

कुछ सबक सिखाने आई थी।


सुभाषचंद्र बोसने जब ये

फानी दुनिया व्यागी थी।

लाल, बाल और पाल ने लोगो के

दिलमें जगह बनाई थी।


शहीद भगत सिंह नाम था जिसका

बसंती चोला पहना था।

मातृभूमिके कारण जिसने

अपना शिश गवाया था।


नाम था उसका सरदार वल्लभ

पर लौह पुरुष कहलाता था।

देश की एकताकी खातिर जिसने

किया मर मिटनेका सौदा था।


नाम था जैसा, वैसा जवाहर

हम सबके संग रहता था।

अपनी आजादीकी खातिर जिसने

तन, मन और धन लुटाया था।


“देश हमारा किसी ने अपना खून बहाकर

अभी आपको बख्शा है।

अब तो सबसे ऊँचा धर्म हमारा

अपने देश की रक्षा है।


बुरे धंधे लडाई झाडेकी बाते

अब तो बंध करो। सत्य,

अंहिसा और प्रेम को मानो

सेवा, धर्म, समभावको पहचानो।



मानवताकी पुकार सुनकर अब

मनसे सदा तैयार रहो।

और कुछ कर मिटने के लिए,

हौसला अपना बुलंद करो।


अगर यह बात समझमें आए

तो जानु कुछ भी ठाना है।

लेकीन अब भी तुम न समझे

तो बेकार कुछ भी कहना है।


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