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Independence Day: ख़ुशियों के गीत गाओ कि पंद्रह अगस्त है-मफ़तूं कोटवी

Md Anees QamarMd Anees Qamar August 16, 2022
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ख़ुशियों के गीत गाओ कि पंद्रह अगस्त है 

सब मिल के मुस्कुराओ कि पंद्रह अगस्त है 


हर सम्त क़हक़हे हैं चराग़ाँ है हर तरफ़ 

तुम ख़ुद भी जगमगाओ कि पंद्रह अगस्त है 


हर गोशा-ए-वतन को निखारो सँवार दो 

महकाओ लहलहाओ कि पंद्रह अगस्त है 


आज़ादी-ए-वतन पे हुए हैं कई निसार 

ख़ातिर में इन को लाओ कि पंद्रह अगस्त है 


रक्खो न सिर्फ़ ख़ंदा-ए-गुल हैं निगाह में 

काँटों को भी हँसाओ कि पंद्रह अगस्त है 


रूहें अमान-ओ-अम्न की प्यासी हैं आज भी 

प्यास इन की अब बुझाओ कि पंद्रह अगस्त है 


शम्अ' ख़ुलूस-ओ-उन्स की मद्धम है रौशनी 

लौ और कुछ बढ़ाओ कि पंद्रह अगस्त है 


ये अहद तुम करो कि फ़सादात फिर न हों 

हाँ आग ये बुझाओ कि पंद्रह अगस्त है 


खाओ क़सम कि ख़ून पिलाएँगे मुल्क को 

दिल से क़सम ये खाओ कि पंद्रह अगस्त है


हर हादसे में अहल-ए-वतन मुस्तइद रहें 

वो वलवला जगाओ कि पंद्रह अगस्त है 


ऊँचा रहे शराफ़त-ओ-अख़्लाक़ का अलम 

परचम बुलंद उठाओ कि पंद्रह अगस्त है 


हो दर्द-ए-दिल में जज़्बा-ए-हुब्ब-ए-वतन फ़ुज़ूँ 

'मफ़्तूँ' क़लम उठाओ कि पंद्रह अगस्त है 



एमडी अनीस कमर

MD ANEES QAMAR



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