मन का बसंत's image
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ठिठुरते जाड़े ने करवट ली
धूप भी गुुुनगुुुना सा खिला है
प्रकृति ने बदला है अपना रंग
तुम भी चलो हमारे संग-संग

हवाओं मेंं मदहोशी का आलम
कलियों का है रुप खिला
भँवरों भी है दीवाने
पक्षियों केे गूँजते है गान

मोहल्लों केे छतों पर
उड़ती पतंगों के साथ
उड़ रहेे है दिल
खिलखिलाकर हँसते चेहरे
सागर में गोंंते लगा रहे है

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