ना कुछ पाया ना कुछ खोया डगर मे's image
Kumar VishwasPoetry1 min read

ना कुछ पाया ना कुछ खोया डगर मे

मारूफ आलममारूफ आलम September 26, 2021
Share0 Bookmarks 31 Reads1 Likes

ना कुछ पाया ना कुछ खोया डगर मे

ता उम्र चला दिवानों की तरह सफर मे


मुड़कर उसने भी राहे सफर बांध लिया

पलट कर जा चुका था मैं भी नगर मे


छुपकर भी छुप ना सका कोई मुझसे

हर एक राजदां अभी तक है नजर मे


तूने हसद के जूनून मे पहचाना नही उसे

तेरा खुदा मौजूद था हर एक बशर मे


जहर को अगर सुकरात बनकर पी लो

तो फिर तो मजा ही मजा है जहर मे

मारूफ आलम

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts