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लकीरें क्यों खिच गईं

मारूफ आलममारूफ आलम September 5, 2021
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इख्तेलाफ क्यों हुआ लकीरें क्यों खिच गईं

भाई भाई,पुकारने वालों जागीरें क्यों बट गईं

क्या रास्ता कुछ और ना था जिससे इख्तेलाफ

ना होता ,प्यार बना रहता

भाई,भाई रहता,यार यार बना रहता

मुझे गम इसका नही कि हम जुदा हुए

गम इसका है ऐसे जुदा हुऐ कि 

एक दूसरे के चेहरे से भी नफरत हो गई

वो मोहब्बत जो बचपन मे थी

जवानी मे कहाँ खो गई

मगर भाई मेरे फिर भी इतनी गुंजाइश रहे

दरमियाँ तुम्हारे हमारे

कि कभी हममें से कोई पहले मर जाए

तो दूसरा उसे देखने आऐगा जरूर

उम्मीद है कम से कम आखिरी वक़्त मे

गिले शिकवे भुलाऐगा जरूर

तुम्हारी ही परछाईं हूँ मैं

आखिर तुम मेरे हो तुम्हारा भाई हूँ मैं

मारूफ आलम

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