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फुर्सत जो मिले दुनियादारी से

Manoj Kumar MishraManoj Kumar Mishra June 12, 2022
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फुर्सत जो मिले दुनियादारी से,
प्रभु दरबार तुम्हारे आ जाऊं।

चरणों में सब कुछ अर्पण करके,
इस जीवन को धन्य बना पाऊं।

मैं आता कैसे रघुराई,
मेरी कुछ मजबूरी है।

जब दर्शन मन करना चाहे,
तभी दिखता काम जरूरी है।

रघुवर के दर्शन पाकर के,
जीवन यह निर्मल कर पाऊं।

फुर्सत जो मिले दुनियादारी से,
प्रभु दरबार तुम्हारे आ जाऊं।।

       मनोज मिश्र 

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