Kanha laut ke Aao
कान्हा लौट के आओ's image
Poetry2 min read

Kanha laut ke Aao कान्हा लौट के आओ

Manoj Kumar MishraManoj Kumar Mishra May 19, 2022
Share0 Bookmarks 139 Reads2 Likes
वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता है
वो मोहन लौट के आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता है

मटकी फोड़ कर माखन
कन्हैया तुम चुराते थे
खिलाकर ग्वाल बालों को
कन्हैया तुम भी खाते थे
मटकी फोड़ने आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता है

वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है।

चराते थे जहां गइया
वो वृंदावन भी सूना है
बंशी की मधुर धुन पर
नचाता श्याम सलोना है
चराने गाय आ जाओ
तुम्हें मधुबन बुलाता हैं

वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है

बरसाने की हर गोपी
तुम्हारी राह तकती है
निधिवन की हर एक डाली
लिपटकर आज रोती है
रचाने रास आ जाओ
तुम्हें मधुबन बुलाता हैं

वह कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है

कदम के पेड़ में मोहन
तुम्हारी याद बसती है
उसकी डालियां सूखी
तुम्हारी बात करती है
सताने गोपियां आओ
तुम्हें मधुबन बुलाता हैं

वो कान्हा लौट के आओ
तुम्हें गोकुल बुलाता है

मनोज कुमार मिश्र 

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts