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जो संघर्षों के आदी हैं

Manoj Kumar MishraManoj Kumar Mishra May 17, 2022
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जो संघर्षों के आदी हैं , नहीं परिणाम से डरते।
लहरें चीर कर के भी, समुंदर पार वो करते।।
किनारो पर खड़े  हो कर, जो पूछे सागर की गहराई।
समंदर क्या वो दरिया भी, कभी ना पार कर सकते।

आजादी के सपनों ने, ली है लाखों की कुर्बानी
ये धरती है भगत सिंह की, यहां लाखों है बलिदानी।
वह शेरनी जिसने, छुड़ाए अंग्रेजों के छक्के
लगा दी जान की बाजी, थी वो झांसी की एक रानी।

हिमालय के शिखर से आज, फिर आवाज है आई 
तू हिंदू है या मुस्लिम है, या है तू सिक्ख इसाई 
सीना चीर के अरि का, दिखा औकात तू उसकी
तेरे भारत की सरहद को, कोई ना छू सके भाई

नमन कर लो बिपिन रावत को अभिनंदन का अभिनंदन।
गलवान घाटी के, अमर वीरो को है वंदन।
निहत्थे वीर जो, चीनी की तोड़ी रीढ़ की हड्डी
भारत मां के उन वीरों, को है दिल से मेरा वंदन।।
             
                 मनोज मिश्र 

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