जो संघर्षो के आदि है
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जो संघर्षो के आदि है Jo sangharsho ke Aadi hai

Manoj Kumar MishraManoj Kumar Mishra February 1, 2022
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जो संघर्षों के आदी हैं , 
नहीं परिणाम से डरते।
लहरें चीर कर के भी, समुंदर पार वो करते।।
किनारो से ही जो पूछे 
सागर की गहराई। 
समंदर क्या वो दरिया भी कभी ना पार कर सकते।

आजादी के सपनों ने 
ली है लाखों की कुर्बानी
ये धरती है भगत सिंह की यहां लाखों है बलिदानी।
बहा कर खून का दरिया बढाया मान वीरों का
लगा दी जान की बाजी 
थी वो झांसी की एक रानी।

हिमालय के शिखर से आज फिर आवाज है आई 
तू हिंदू है या मुस्लिम है 
या है तू सिक्ख इसाई 
सीना चीर के अरि का 
दिखा औकात तू उसकी
तेरे भारत की सरहद को कोई ना छू सके भाई

नमन कर लो बिपिन रावत को अभिनंदन का अभिनंदन।
गलवान घाटी के अमर वीरो को है वंदन।
निहत्थे वीर जो चीनी की तोड़ी रीढ़ की हड्डी
भारत मां के उन वीरों को
है दिल से मेरा वंदन।।

मनोज कुमार मिश्र 

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